शुक्रवार, 16 जून 2017

खिलता_कमल

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    गांधी और नेहरू के साथ साथ काँग्रेस पार्टी से हमारे नफरत के कई कारण है और उसमे से ये एक प्रमुख है। हाँ ये सच जरुर है की बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी... के संस्थापक मदनमोहन मालवीय जी ने 14 फरवरी 1931 को लार्ड इरविन के सामने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी रोकने के लिए मर्सी पिटिशन फ़ाइल की थी ताकि भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को फांसी न दी जाये, कुछ सजा कम की जाये
    लार्ड इरविन ने कहा की चूँकि आप कांग्रेस के पूर्व अध्य्क्ष है इसलिए आपको इस पिटिशन के साथ मोहनदास गाँधी के साथ जवाहर लाल नेहरु सहित कांग्रेस के कम से कम 20 सदस्यों का पत्र होना चाहिए लेकिन गाँधी और नेहरु ने भगत सिंह की मर्सी पिटिशन पर चुप्पी साध ली और अपनी सहमती नही दी, और नेहरू के मना करने पर अन्य कांग्रेसी नेताओं ने भी अपने पत्र नहीं दिए
    ब्रिटेन में रिटायर होने के बाद लार्ड इरविन ने लन्दन में कहा था, “यदि गाँधी या नेहरु एक बार भी भगत सिंह के फांसी पर अपील करते तो हम उनकी फांसी रद्द कर देते लेकिन पता नही क्यों मुझे ऐसा महसूस हुआ की गाँधी और नेहरु को भगत सिंह को फांसी देने की अग्रेजो से भी ज्यादा जल्दी थी”
    फाँसी देने से पहले लाहौर जेल के जेलर ने गाँधी को पत्र लिखकर पुछा था अगर इन तीन लड़कों को फाँसी दी जाती है तो देश में कोई बवाल तो नहीं होगा। गाँधी ने उस पत्र का लिखित जवाब दिया के आप अपना कार्य करें कुछ नहीं होगा।

    प्रो. कपिल कुमार की किताब से गाँधी और लार्ड इरविन के बीच समझौता के समय इरविन इतना आश्चर्य में था की गाँधी और नेहरु दोनों में से किसी ने भी भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को छोड़ने की कोई चर्चा तक नही की ।
    इरविन अपने दोस्तों से कहता था की “हम ये मानकर चल रहे थे की गाँधी और नेहरु भगत सिंह की रिहाई के लिए अड़ जायेंगे और हम उनकी ये मांग मान लेते”
    भगत सिंह को फांसी देने के लिए जितनी दिलचस्बी अंग्रेज नहीं दिखा रहे थे, उस से अधिक गाँधी और नेहरू भगत सिंह को फांसी पर चढ़ा देना चाहते थे क्योंकि भगत सिंह दिन प्रतिदिन भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे थे और गाँधी नेहरू इसी से चिंतित थे, और चाहते थे की भगत सिंह को जल्द फांसी हो, लार्ड इरविन ने ये बात स्वयं कही
    अब भी कोई भारतीय हमसे ये कहे की गाँधी और नेहरू महान थे, तो हमे उस भारतीय पर शर्म आती है, क्योंकि वो भी इस देश पर बोझ है और इन गाँधी नेहरू के वंशजो ने तो किताबों तक में भगत सिंह को “आतंकवादी” बता दिया ......
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कसम खाते हैं हम काले कुत्ते को वोट दे देंगे पर इन हरामखोरों को कभी नही...और अब तैयार रहें जो भी पक्ष लेते हैं इस पार्टी का अब हम बताते हैं असहिष्णुता क्या होती है... इन्होंने अपनी राक्षसी प्रवृत्ति दिखा दी न अब हम भी देखें हमारे शास्त्र क्या कहते हैं अब वही करेंगे... अब बेटा रोना की दादी को मार दिया, पापा को मार दिया....बेटा लक्षण थे ऐसे जो मार दिए गए और कोई बात नही है...खत्म हो जाओगे इसी तरह जो बचे हो तुम लोग...










दुनिया के 26 देश चीन में बैठ कर वन बेल्ट वन रोड वाली डील साइन कर रहें हैं, सिल्क रुट को पुनर्बहाल करने की आड़ में चीन उपनिवेशीकरण 2.0 करने का जबरदस्त प्रयास कर रहा है।

मुसीबत की घड़ी है और बेचैन होने का वक़्त है। पाकिस्तान अब दुश्मन नहीं रहा, वह तो स्वयं 10-15 साल का मेहमान है जब तक चीन उसपर क़ब्ज़ा न कर ले। आपके पड़ोस में अब चीन आने वाला है, और भी ज़्यादा ताकतवर होकर। भारत पूरे इलाके में अलग थलग पड़ा हुआ है।

इन सब मुद्दों के बारे में जागरूक होइए, कपिल-केजरीवाल से ऊपर उठ कर इन सब मुद्दों पर चर्चा कीजिये। मोदी-अजित डोवाल के सामने अभूतपूर्व चुनौती है और आपकी सरकार वास्तव में काफी कुछ कर रही है इसके लिए, नेतृत्व को अपना मनोवैज्ञानिक समर्थन दीजिये। 




भाईसाहब सेना को पत्थर मारते थे, भटके हुवे कश्मीरी हैं। खुद को हफ़ीज सईद से कम नहीं समझते रहे होंगे। सेना ने इनका भटकाव रोकने के लिए पिछवाड़े में भूसा भरना सही समझा,बांध दिया गाड़ी के आगे...
और हाँ जिसको ये देख दुःख हो रहा हो न,वो चूड़ियाँ तोड़े...गाने गाये कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को।''
हमे तो ये फोटु देख उतनी ही तसल्ली मिल रही जीतना सचिन को वर्ल्ड कप जीतने के बाद मिली होगी। #बाप_बाप_होता_है बे कश्मिरी कुत्ते.....



पिछले दिनों बहुत से हुशियार मनमोहन सिंह को अर्थशास्त्री बताते हुए ज्ञान बाँट रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री मंदमोहन सिंह ने कहा था कि नोटबन्दी से अर्थव्यवस्था रुक जाएगी और विकास कम से कम 2% नीचे आ जाएगा। कल आये आंकड़ों को वो सारे लोग बत्ती बना कर रख सकते हैं, जिनके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 7% की विकास दर पर ही चलेगी। ऐसा अर्थशास्त्री होकर बेइज़्ज़ती करवाने से बढ़िया आदमी मनरेगा में मजदूरी कर ले। #खिलता_कमल

सैनिको पर पत्थर - अहिंसक आंदोलन

भारत तेरे टुकडे - अभिव्यक्ति आजादी

भंसाली को थप्पड़ - हिन्दू आतंकवाद

गौमांस भक्षण - भोजन का अधिकार

ईद पर बकरा काटना - धार्मिक स्वतंत्रता

तीन तलाक हलाला - धार्मिक अंदरूनी मामला

दीवाली पटाखे - पर्यावरण प्रदूषण

न्यू इयर पटाखे - आक्सीजन निकलता है

मटकी फोड छोटे बच्चे नही- गलत

प्लेटफार्म पर नमाज - धार्मिक अधिकार

सड़क पर पंडाल - सड़क जाम का केस

मस्जिद लाउडस्पीकर। - धार्मिक स्वतंत्रता

मंदिर मे लाउडस्पीकर - ध्वनि प्रदूषण

करवाचौथ ढकोसला

वैलेंटाइनडे प्यार का पर्व

चार शादियां धार्मिक स्वतंत्र

हिन्दू दो शादी केस दर्ज

गणेश विसर्जन, होली जल प्रदूषण

ताजिया विसर्जन संविधान अधिकार

देवताओ देवी अपमान कला की अभिव्यक्ति

मोहम्मद पर बयान रासुका धारा, तोडफोड
ये है भारत की सच्चाई ।


राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा था लोग पूछने लगे भाई बीजेपी वाले लगते हो,
उनका कहना है उन्हें देशभक्ति का certificate नहीं चाहिए,उनका कहना है कोई भी देशभक्ति का मानदण्ड तय नहीं कर सकता।
तो मेरे भाई तुम क्या कर रहे हो?
मैंने कहा मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ,तुमने कहा या तो मैं बीजेपी से हूँ या मोदी भक्त हूँ या rss से हूँ ।
तो मेरे भाई अब तुम तय करोगे मानदण्ड डेस्कभक्ति का या तुम मानते हो कि मोदी भक्त,बीजेपी या फिर rss वाले ही देशभक्त हो सकते हैं?
और नहीं तो तुम बता दो क्या होना चाहिए देहभक्ति की परिभाषा?
तुम्हारे हिसाब से तो "भारत तेरे टुकड़े होंगे" कहने वाले देशभक्त हैं, कसाब और अफजल गुरु जैसे आतंकी देशभक्त हैं और जो देश के सम्मान में खड़ा होना चाहता है वो मुर्ख बीजेपी या मोदी भक्त है।

तुम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हो पर भाई एक बार राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भी बात कर लो,1 मिनट राष्ट्र के सम्मान में खड़े होने में तुम्हें अपार कष्ट होता है पर तुमको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता चाहिए,और तुम देश को तोड़ने की बात करो और मुझसे आशा करो कि मैं सुनता रहूं तो मेरे भाई ये सहन नहीं होगा,जो भी भारत माता के विरुद्ध बोलेगा उसका तो मुंह तोड़ेंगे ही हम।
और किसका समर्थन कर रहे हो तुम जो देश को तोड़ने की बातें करता है।
चलो एक बात बता दो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है मुझे तुम्हारे माँ को गालियाँ दे दूँ या फिर तुम्हारे खानदान को ख़त्म करने की बात करूँ, तुम क्या करोगे चुपचाप सुनोगे ना क्योंकि मुझे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।
तो मेरे भाई ये कन्हैया और उसके jnu वाले दोस्त जो कश्मीर की आजादी की बातें करते हैं भारत माँ को गालियाँ देते हैं ये सहन नहीं होगा,कभी भी नहीं होगा।
अगर तुम मुझे पत्थर मार कर मुझसे मुस्कुराने की उम्मीद रखते हो तो ये नहीं होगा।

हाँ मुझे प्रेम है अपने देश अपनी भारत माता से,


वीरेंद्र सहवाग पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पूर्व भारतीय कप्तान हैं। वह अपने नाम पर कई रिकॉर्ड रखता है जिसमें टेस्ट क्रिकेट में एक भारतीय द्वारा बनाए गए उच्चतम स्कोर भी शामिल हैं। वे विस्डेन लीडिंग क्रिकेटर के रूप में सम्मानित होने वाले एकमात्र भारतीय हैं। उन्होंने अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री दोनों को जीत लिया है।

बबिता फाोगट एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय महिला पहलवान है, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और एक रजत पदक और 2012 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत लिया है।

योगेश्वर दत्त एक ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, एक राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक विजेता और एक पद्मश्री पुरस्कार विजेता है।

तीनों ने तिरंगा की महिमा के लिए अपना खून और पसीना दिया है।

लेकिन आत्म-प्रमाणित 'उदार बौद्धिक', जावेद अख्तर के अनुसार, वीरेंद्र सहवाग एक 'शायद ही साक्षर' खिलाड़ी है और योगेश्वर दत्त और बबिता फोोगैट केवल 'पहलवानों का ट्रोल' हैं।

तुम जानते हो क्यों?

क्योंकि दत्त, फोगत और सहवाग गुर्हेर कौर के खिलाफ अपने असंतोष का व्यक्त करने के लिए काफी स्पष्ट थे। उन्होंने दुरुपयोग नहीं किया, या सीधे उसे सीधे संदर्भित किया, या किसी भी नफरत को घुसने या किसी व्यक्तिगत टिप्पणी को नहीं बनाया।

और फिर भी, उन्हें मुख्यधारा के मीडिया के द्वारा 'ट्रॉल' कहा जाता है, क्योंकि वे इस बात पर सवाल उठाने की हिम्मत करते थे कि एमएसएम निर्माण करना चाहता है।

जावेद अख्तर के अनुसार, किसी भी दो बिट अभिनेता, निर्देशक, लेखक या साधारण गीतकार के पास ईश्वर को अर्थव्यवस्था से लेकर खेल तक राष्ट्र की अवस्था तक परमाणु भौतिकी पर टिप्पणी करने का अधिकार है, और उनकी राय को सुसमाचार की सच्चाई के रूप में स्वीकार किया जाना है ।

लेकिन वास्तविक खेलों के प्राप्तकर्ताओं को फाइबर कथानक के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करने की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।

किण्डा मेरी बात को साबित करता है, भारतीय फिबर्स के पाखंड और दुश्मनी के बारे में।

उनका असंतोष असंतोष है, हर कोई असहमति trolling है!

मौसी: लेकिन बेटा, बुरा नहीं मानना, इतना तो पूछना ही पड़ता है, कि Kanhaiya Kumar का खानदान क्या है, उसके लछछन कैसे है, कमाता कितना है? दोस्त : कमाने का तो यह है, मौसी.... कि एक बार JNU से स्टाईपेंड बंद हो गयी तो ... कमाने भी लगेगा. मौसी : स्टाईपेंड मतलब, बच्चा पढ़ रहा है? इतनी कम उमर में शादी? दोस्त : नहीं नहीं ये मैंने कब कहा मौसी. लडका तो 30 साल का है. वहाँ तो 40, 45 साल के बच्चे भी स्टूडेंट होते हैं. मौसी : हाय दैया, इतना बड़ा लड़का? और रहता कहाँ है, होस्टल में? दोस्त : वैसे रहता होस्टल में है पर कभी कभी पुलिस थाने में सोना पड़ता है... मौसी : पुलिस थाने में? तो क्या लड़का चोर है? दोस्त : वो और चोर ना... ना मौसी वो तो क्रांतिकारी है. कभी कभी दोस्तों के साथ अफजल के समर्थन में या पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे देता पकड़ा जाता है तो पुलिस उठा के ले जाती है. मौसी : ही ही बस यही एक कमी रह गयी थी. मतलब देशद्रोही है वो? दोस्त : मौसी आप तो मेरे दोस्त को गलत समझ रही हैं. वो तो इतना सीधा और भोला है कि आज़ादी के चक्कर में उसे होश ही नहीं रहता कि वो कौन से देश का है. मौसी : अरे बेटा, मुझ बुढ़िया को समझा रहे हो, मेरे बचपन में हम आजाद हो चुके हैं. अब कौनसी आजादी मांग रहा है? दोस्त: बस मौसी, उसका पता चलते ही हम आप को खबर दे देंगे. मौसी : एक बात की दाद दूँगी बेटा, भले सौ बुराईयां है, तुम्हारे दोस्त में फिर भी तुम्हारे मुंह से उस के लिए, तारीफ ही निकलती है. दोस्त : अब क्या करूं मौसी.... मेरा तो नाम ही केजरीवाल

भारत विचित्र देश है। तर्कसंगति‍ यहां सर्वाधि‍क असंभव विचार है। तथ्य तो कल्पना है। महत्व केवल अमूर्त संवेगों और भावनात्मक अपील का है, जिसके आधार पर मनचाहे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।

मौजूदा हाल में भी ऐसा ही नज़र आ रहा है। हद्द तो यह है कि किसी का बचाव भी अगर करना हो तो उसके पक्ष में बड़ी बेतुकी बातें कही जाती हैं, जिनमें "सबऑर्डिनेट सेंटेंस स्ट्रक्चर" के तहत दो वाक्यों की "युति" में उन दोनों वाक्यों की आपस में कोई संगति नहीं होती! पहला वाक्य अगर "अ" के संदर्भ में है तो दूसरा वाक्य "ब" के संदर्भ में हो सकता है और इन दोनों को मिलाकर "स" के पक्ष में निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। "लॉजिकल कहरेंस" से हमारी शत्रुता है।

"स्थापना", "निष्कर्ष" और "कुतर्क" की इस त्रयी के माध्यम से इस विडंबना को इस तरह समझा जा सकता है :

##

स्थापना : वो केवल 22 साल की है।
निष्कर्ष : इसलिए वो सही है।
कुतर्क : जो कमउम्र होता है वो सही होता है, जैसे बम्बई हमले के समय कसाब 21 का था, इसलिए वो सही था।

स्थापना : वो बेटी है।
निष्कर्ष : इसलिए वो सही है।
कुतर्क : जो बेटी होती है, वो सही होती है। माया कोडनानी भी बेटी थी, इसलिए वो सही थी।

स्थापना : उसे धमकियां दी जा रही हैं।
निष्कर्ष : इसलिए वो सही है।
कुतर्क : जिसे धमकियां दी जाती हैं, वह सही होता है। अमरीका ने अलक़ायदा को धमकाया था, इसलिए अलक़ायदा सही है।

स्थापना : वह शांति चाहती है।
निष्कर्ष : इसलिए वो सही है।
कुतर्क : शांति एक संपूर्ण अवधारणा है और वह हमेशा सही होती है। भगत सिंह शांति नहीं चाहते थे। इसलिए वे ग़लत थे। लेनिन संघर्ष कर रहे थे। इसलिए ज़ारशाही सही थी। फ़लस्तीनी इज़रायल के साथ संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए इज़रायल सही है।

स्थापना : वह युद्ध विरोधी है।
निष्कर्ष : इसलिए वो सही है।
कुतर्क : ऐतिहासिक अन्याय जैसा कुछ नहीं होता। "एग्रेशन" और "प्रोवोकेशन" जैसा कुछ नहीं होता। संप्रभुता नहीं होती। राष्ट्र नहीं होता। भूगोल नहीं होता। केवल "युद्ध" होता है। 1948, 1965, 1971, 1999 में युद्ध "हुआ" था। किसी ने वह युद्ध "किया" नहीं था। या बेहतर हो अगर कहें कि युद्ध ने पाकिस्तान और भारत किया था। भारत और पाकिस्तान ने युद्ध नहीं किया था। और युद्ध की पहल युद्ध द्वारा की गई थी, युद्ध की पहल पाकिस्तान द्वारा नहीं की गई थी।

इसलिए वो सही है!

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जिसे कि अंग्रेज़ी में कहते हैं : RIP, Logic!

भारतवर्ष के बुद्ध‍िजीवियों को तर्कसंगति के इस दु:खद अवसान पर दो मिनट का मौन रखना चाहिए।


पहले किसी को रेप की धमकी मिलती थी तो पुलिस स्टेशन जाते थे अब NDTV जाते हैंऔर पुरे एक घण्टे का प्रोग्राम होता है बरखा दत्त के साथ

किसी अनपड़ ने गुस्से मैं बोल दिया तो आपने बवाल मचा दिया रेप इस नोट अ जोक करके
लेकिन आपकी पार्टी का संदीप कितने गरीबों का रेप कर गया उसके विरोध मैं आपने एक पोस्ट भी नही डाला आखिर क्यों

गुरमेहर जी आप का प्रोफाइल चेक किया पिछले 2 hour से मैंने समझ मैं आ गया किस मानसिकता से सम्बन्ध रखती हैं आप

पाकिस्तान मैं हुए हर ब्लास्ट मैं आपने सांत्वना जताई है
लेकिन पिछले दिनों इंडिया मैं हुए ट्रेन एक्सीडेंटों जिसमे 100 से ज्यादा लोग मारे गए आप ने एक पोस्ट भी नही डाला

सर्जिकल स्ट्राइक के विरोध मैं आपने 4 पोस्ट डाली हैं उरी हमले के बारे मैं पोस्ट ढूढ़ने से भी नही मिली
यानि वो हमारे सोते हुए जवानों को शहीद कर जाए वो सही और हम कार्यवाही करें ये आपके हिसाब से गलत है और अपने को शहीद की बेटी बोल के अच्छा इस्तेमाल किया है आपने उनका उनकी भी आत्मा आज बहुत रो रही होगी

आप कहती हैं मैं शहीद के बेटी हु और ऊपर से उमऱ खालिद जैसे लोगो के साथ खड़े होके नारे लगाते हैं जो आर्मी जवानो को बलात्कारी और निक्कमा बताते हैं और आतंकियों को फ्रीडम फाइटर ये डबल statndard नही चलेगा क्लियर बताओ चाहती क्या हो

एक तरफ आप कहती है की avbp ने पत्थर मारे उन पर हिंसा का केस दर्ज़ हो दूसरी तरफ आप कहती है आर्मी जवानो पे पत्थर बाज़ी करना हिंसा का हिस्सा नही है आक्रोश जताने का तरीका है मतलब तुम करो तो रास लीला कोई और करें तो कैरेक्टर ढीला वाह

आपके ज्यादातर मित्र पाकिस्तान से ही है और
कश्मीरी पथरबाज़ो की बड़ी पीड़ा है आपको
मोहतरमा कभी समय हो तो उस गिलानी से जरूर पूछिये की 500 500 रूपये मैं क्यों कश्मीर के युवाओं को तबाह कर रहा है जबकि अपने बच्चे देल्ही विदेशो मैं मोज मार रहे हैं

और एक लास्ट बात कब से लिन्क निकालने की सोच रहा हु तुमने कहा तुमको संघ आरएसएस बीजेपी मोदी से दिक्कत है
चलो हम तुम्हारे साथ हैं
अब सिर्फ ये बतादो कश्मीर की आज़ादी तक जंग रहेगी भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी इसका संघ मोदी से क्या तालुक
क्या भारत सिर्फ मोदी आरएसएस बीजेपी का है

कुल मिला के सार ये निकला की तुम सिर्फ लाइम लाईट मैं आने के लिए ये सब ड्रामे कर रही हो कोई पार्टी गोद ले ही लेगी तुमको भी गद्दार कन्हैय्या की तरह




मुस्लिम भाइयों !!
भाई निराश न हो.. आपके यहाँ की भी बहुत सी महिलायें हम लोग ब्याह कर लाए हैं..
लो शाम तक लिस्ट आराम से पढ़ो..
सुनील दत्त - नर्गिस...
संजय दत्त - दिलनवाज शैख़ (मान्यता)
ऋतिक रोशन - सुजेन खान
अतुल अग्निहोत्री - अलविरा खान
रोहित राजपाल - लैला खान
किशन चंदर - सलमा सिद्दीकी
नाना चुडास्मा - मुनिरा जसदानवाला
अजय अरोरा - सिमोन खान
आदित्य पंचोली - ज़रीना वहाब
अजीत आगरकर - फातिमा घन्दिल्ली
सुनील शेट्टी - माना कादरी

अरुण आहूजा (गोविंदा के पिताजी ) - नजीम
शिरीष कुंदर - फरहा खान
सुंदर c - खुशबू
अरुण गवली - आयशा
मनोज वाजपेयी - शबाना रजा
पंकज कपूर - नीलिमा अज़ीम
गुंडू दिनेश राव - तबस्सुम
अनिल धारकर - इम्तिआज़ गुल
शशि रेखी - वहीदा रहमान
राज बब्बर - नादिरा ज़हीर
कर्नल सोढ़ी - नफीसा अली
मयूर वाधवानी - मुमताज़
रंधावा - मलिका खान
विष्णु भागवत - निलोफर
किशोर कुमार - मधुबाला (मुमताज़ बेगम)
v s नाइपाल - नादिया
कबीर सुमन - सबीना यास्मिन
राजीव राय - सोनम (बख्तावर)
बी आर इशारा - रेहाना सुल्तान
समीर नेरुकर - तसनीम शैख़
अनुराग मोदी - शमीम
कमलेश्वर नाथ सहगल - जोहरा खान
विक्रम मेहता - तसनीम
सौमिल पटेल - अनीता अय्यूब
भारत चन्द्र नारा - जहा आरा चौधरी
टीनू आनंद - शहनाज
एम एस सथ्यु - शमा जैदी
रवि शंकर - रोशन आरा
प्रदीप चेरियन - फौजिया फातिमा
पंकज उधास - फरीदा
के एन सहाय - जाहिदा हुसैन
ब्रिज सदाना - सईदा खानम
निर्मल पांडे - कौसर मुनीर
विजय गोविल - तबस्सुम
अमित मोइत्रा - नाहिद करीमभॉय
रूप के शोरी - खुर्शीद जहाँ
हंसलाल मेहता - सफीना हुसैन
कुमुद मिश्रा - आयशा रजा
रणजीत बेदी - नाजनीन
मनोज प्रभाकर - फरहीन
रोहित रामकृष्णनन - शबनम मिलवाला
गनपत लाल भट्टी - शमशाद बेगम
आर के पूरी - शहनाज़ हुसैन
टी के सप्रू - ताजोर सुल्ताना
रमेश भगवे - जैनब
महेश कौल - चाँद उस्मानी
किशोर शर्मा - मलिका बानो
चमन लाल गुप्ता - असगरी बाई
राजा बहाद्दुर शिवेंद्र सिंह - यमन खान
हेमंत भोंसले - साजिदा
विवेक नारायण - सोनिया जहाँ
सारनाथ बेनर्जी - बेनी आबिदी
अशोक काक - जबीं जलील
सुमेध राजेंद्रन - मासूमाँ सय्यद
धीरज सिंह - सहर जहाँ
गौरव करण - फातिमा मेहंदी
मनीष तिवारी - नाजनीन शिफा
शिरीष गोडबोले - ज़रीना मोइदु
इन्द्रजीत गुप्ता - सुरैया
सीताराम येचुरी - सीमा चिश्ती
नरसिंह ज्ञान बहाद्दुर - जुबैदा बेगम
सुमित सहगल - शाहीन
अर्जुन प्रसाद - परनिया कुरैशी
बालगन्धर्व - गोहर जान कर्नाटकी
रणजीत मल्होत्रा - रुबीना बक्षी
गजेन्द्र चौहान - हबीबा रहमान
राजीव राव - सोनिया फतह
संजय भौमिक - सबा नकवी
पी जी सतीश - शकीला
मलिन गज्जर - उमैमा बंदूकवाला
सचिन उपाध्याय - नाजिया युसूफ
राजिव सिंह - सनोबर कबीर
रितेश पंड्या - रोही मिर्ज़ा
विन्दु - फरहा नाज़
अनिल विश्वास - मेहरुन्निसा
*ये मैसेज जम के शेयर करो नाम ही काफी है* ।।
🚩जय श्री राम

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